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Teacher’s Day 2024 : देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को मानते हैं शिक्षक दिवस के रूप में

भारतीय शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है शिक्षक दिवस

‘हाड़ा’ विकास सिंह
एडिटर इन चीफ
ऑनलाइनखबर.लाइव

स्वतंत्र भारत के प्रथम उप राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 5 सितंबर, 2024 को 136वीं जयंती मनाई जा रही है। भारत की स्वतंत्रता के बाद देश को आधुनिक शिक्षा की दिशा में आगे ले जाने में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक के रूप में की थी। एक अध्यापक होने के साथ ही राधाकृष्णन प्रसिद्ध दार्शनिक, विचारक और राजनेता भी थे, इसलिए उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर हर वर्ष 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ (Teacher’s Day) के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस की स्थापना का इतिहास 62 साल पुराना है। इसकी नींव 5 सितंबर 1962 को पड़ी। इस दिन भारतीय शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है। वर्ष 1954 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्‍न’ (Bharat Ratna) से सम्मानित किया गया था।

नाम – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan)
जन्म – 5 सितंबर 1888
जन्म स्थान – तिरुत्तानी, तमिलनाडु
माता- सर्वपल्ली सिताम्मा
पिता – सर्वपल्ली वीरास्वामी
पत्नी – सिवाकमु राधाकृष्णन
बच्चे – 5 पुत्री, 1 पुत्र
कार्य – दार्शनिक, शिक्षाविद, विचारक, राजनीतिज्ञ
पद – प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति
सम्मान – सन 1954 में ‘भारत रत्न’
मृत्यु – 17 अप्रैल 1975 (आयु 86 वर्ष)

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का प्रारंभिक जीवन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को ब्रिटिश भारत की मद्रास प्रेसिडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के चित्तूर जिले के तिरुत्तानी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम ‘सीताम्मा‘ और पिता का नाम ‘सर्वपल्ली वीरास्वामी‘ था। इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का बचपन तिरुत्तानी गांव में ही व्यतीत हुआ। वहीं से इन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा प्रारंभ की। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए उनके पिता ने उन्हें क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल, तिरुपति में एडमिशन करा दिया। जहाँ उन्होंने सन 1896 से 1900 तक अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण की।

इसके बाद उन्होंने वेल्लोर के कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की, बाद में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और वर्ष 1906 में दर्शन शास्त्र में एमए किया। उनकी पूरी शिक्षा स्काॅलरशिप के जरिए हुई थी।

राधाकृष्णन का 16 वर्ष की आयु में ही अपनी दूर की चचेरी बहन ‘सिवाकमु’ से विवाह हो गया था। जिनसे उन्हें 5 बेटी और 1 बेटा हुआ। इनके बेटे का नाम ‘सर्वपल्ली गोपाल’ है, जो भारत के महान इतिहासकारक थे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का करियर

वर्ष 1909 में राधाकृष्णन ने ‘मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज’ में दर्शनशास्त्र के प्रोफ़ेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह ‘मैसूर विश्वविद्यालय’ में भी दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे। यह ब्रिटिश शासन में एक बड़ी उपलब्धि थी, जब एक भारतीय को यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर नियुक्त किया गया था।उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक अध्यापन का कार्य किया।

इसके बाद वर्ष 1926 में राधाकृष्णन ने भारत की ओर से अमेरिका के ‘हार्वर्ड विश्वविद्यालय‘ में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ फिलॉसफी में CU का प्रतिनिधित्व किया था। उनके ज्ञान और प्रतिभा के कारण उन्हें बाद में इंग्लैंड की विश्वविख्यात ‘ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय’ में पूर्वी धर्म और नैतिकता के ‘स्पैल्डिंग प्रोफेसर’ के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

वर्ष 1931 से 1936 तक राधाकृष्णन आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे, जिसके कुछ वर्षों बाद ही उन्हें 1939 में ‘काशी हिंदू विश्वविद्यालय‘ का कुलपति बनाया गया। जहाँ वह वर्ष 1948 तक कार्यरत रहे। वहीं राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित भी किया गया था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुल्नीय कार्यों और उपलब्धियों के कारण ही हर वर्ष उनके जन्मदिवस के अवसर पर ‘शिक्षक दिवस’ मनाया जाता है।

डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन 

राधाकृष्णन एक शिक्षक होने के साथ साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। वह वर्ष 1949 से 1952 तक सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (USSR) के राजदूत रहे और वर्ष 1952 में भारत के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए। इसके कुछ समय बाद ही उन्हें वर्ष 1962 में भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। इसी बीच वर्ष 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया।

इसके अलावा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को अपने जीवन में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिसमें जर्मनी का पुस्तक प्रकाशन द्वारा ‘विश्व शांति पुरस्कार’ सबसे खास माना जाता हैं। राधाकृष्णन जी का 17 अप्रैल सन 1975 को 86 वर्ष की उम्र में चेन्नई में लंबी बीमारी के बाद इनका देहांत हो गया। लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत माने जाते हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा लिखित पुस्तकें

  • द हिंदू व्यू ऑफ लाइफ
  • द आइडियलिस्ट व्यू ऑफ लाइफ
  • रिलिजन एंड सोसाइटी
  • ए सोर्सबुक इन इंडियन फिलॉसोफी
  • स्पिरिट ऑफ़ रिलिजन
  • महात्मा गांधी द फिलॉसोफी ऑफ़ हिंदूज्म
  • ईस्टर्न रिलिजनस वेस्टर्न थॉट
  • लिविंग विथ ए पर्पस
  • सर्च फॉर ट्रुथ
  • द फिलॉसोफी ऑफ़ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनमोल विचार

  • पुस्तकें वह माध्यम हैं, जिसके द्वारा हम संस्कृतियों के बीच ब्रिज का निर्माण करते हैं।
  • सनातन धर्म सिर्फ एक आस्था नहीं है। यह तर्क और अन्दर से आने वाली आवाज का समागम है, जिसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है, परिभाषित नहीं।
  • शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि चुनौतियों के लिए तैयार करें।
  • किताब पढ़ना, हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी देती है।
  • जीवन को एक बुराई के रूप में देखना और दुनिया को भ्रमित होकर देखना गलत है।
  • धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं खुद जीवन नहीं।
  • शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। इसलिए विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।
  • पुस्तकें वो साधन हैं, जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।
  • शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है।
  • भगवान की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके नाम पर बोलने का दावा करते हैं।

27.05.1964 प्रधानमंत्री नियुक्त होने पर गुलजारी लाल नंदा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते डॉ. एस. राधाकृष्णन (पीटीआई)

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो और एस राधाकृष्णन (पीटीआई)

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन (पीटीआई)

तमिलनाडु मुख्यमंत्री के कामराज ने मीनाम्बक्कम हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन का स्वागत करते

लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. एस राधाकृष्णन और नेपाल नरेश महेंद्र वीर विक्रम शाह

राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत रत्न का पुरस्कार प्रदान करते

जाकिर हुसैन भारत के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेते हुए। तस्वीर में डॉ. एस राधाकृष्णन और मुख्य न्यायाधीश वांचू भी दिख रहे हैं।

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